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शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्

पंचाक्षर स्तोत्र — य

शिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् — ५
मूल मूल पाठ
यक्षस्वरूपाय जटाधरायपिनाकहस्ताय सनातनाय ।दिव्याय देवाय दिगम्बरायतस्मै यकाराय नमः शिवाय ॥
yakṣa-svarūpāya jaṭā-dharāyapināka-hastāya sanātanāya |divyāya devāya digambarāyatasmai ya-kārāya namaḥ śivāya ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

जिन्होंने यक्ष का रूप धारण किया, जो जटाधारी हैं, हाथ में पिनाक धनुष लिए हैं, सनातन हैं; दिव्य देव, दिगंबर — उन “य”कार स्वरूप शिव को नमस्कार।

भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं

अंतिम श्लोक — “य” का। “यक्ष का रूप” यक्षेश्वर की कथा की याद दिलाता है, जिन्होंने देवताओं का गर्व तोड़ा।

प्रमाण प्रमाण
परंपरा
से
शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्
श्लोक 5
रचयिता (परंपरा अनुसार): आदि शंकराचार्य (परंपरा अनुसार)
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मूल पाठ

यक्षस्वरूपाय जटाधराय

पिनाकहस्ताय सनातनाय ।

दिव्याय देवाय दिगम्बराय

तस्मै यकाराय नमः शिवाय ॥

yakṣa-svarūpāya jaṭā-dharāya

pināka-hastāya sanātanāya |

divyāya devāya digambarāya

tasmai ya-kārāya namaḥ śivāya ||

अनुवाद

जिन्होंने यक्ष का रूप धारण किया, जो जटाधारी हैं, हाथ में पिनाक धनुष लिए हैं, सनातन हैं; दिव्य देव, दिगंबर — उन “य”कार स्वरूप शिव को नमस्कार।

अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

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