ग्रन्थग्रंथ-संग्रह

जहाँ शिव का वर्णन है

ऋग्वेद से कर्नाटक के वचनों तक — तीन हज़ार वर्षों के ग्रंथ। इस साइट का हर श्लोक इन्हीं में से किसी तक पहुँचाता है।

वेद
ऋग्वेद
लगभग 1500–1000 ई.पू.

Ṛgveda

वैदिक संस्कृत

सबसे प्राचीन वेद: ब्रह्मांड की शक्तियों के प्रति एक हज़ार से अधिक सूक्त।

रुद्र — आँधी के स्वामी, वैद्य और धनुर्धर — की स्तुति कुछ सूक्तों में है। महामृत्युंजय मंत्र (7.59.12) यहीं है।
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वेद
यजुर्वेद — श्रीरुद्रम्
लगभग 1200–800 ई.पू.

Yajurveda — Śrī Rudram

वैदिक संस्कृत

यज्ञ-मंत्रों का वेद, दो शाखाओं में: कृष्ण और शुक्ल।

श्री रुद्रम् (तैत्तिरीय संहिता 4.5; वाजसनेयी संहिता 16) — रुद्र की महान स्तुति, और “नमः शिवाय” का स्रोत।
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उपनिषद्
श्वेताश्वतरोपनिषद्
लगभग 5वीं–1ली शताब्दी ई.पू.

Śvetāśvatara Upaniṣad

संस्कृत

छह अध्यायों का दार्शनिक उपनिषद्, भक्ति-भाव से भरा।

रुद्र-शिव को एकमात्र परम सत्य बताने वाले प्राचीनतम ग्रंथों में।
इतिहास
महाभारत
संकलन लगभग 400 ई.पू. – 400 ई.

Mahābhārata

संस्कृत

भारत-युद्ध का महाकाव्य — और उसके चारों ओर कथाओं का सागर।

अर्जुन और किरात, त्रिपुर-दहन, अनुशासन पर्व का शिव सहस्रनाम, और भी बहुत कुछ।
इतिहास
वाल्मीकि रामायण
संकलन लगभग 5वीं शताब्दी ई.पू. – 3री शताब्दी ई.

Vālmīki Rāmāyaṇa

संस्कृत

राम की कथा — संस्कृत का आदिकाव्य।

गंगा-अवतरण, कुमार का जन्म, रावण का कैलाश उठाना, राम का शिव-धनुष तोड़ना।
पुराण
शिवपुराण
अनेक शताब्दियों में संकलित, पहली सहस्राब्दी ई. से आगे

Śiva Purāṇa

संस्कृत

शिव का केंद्रीय पुराण, सात संहिताओं में: विद्येश्वर, रुद्र (पाँच खंडों में), शतरुद्र, कोटिरुद्र, उमा, कैलास और वायवीय। अध्याय-संख्या संस्करणों में बदलती है; हमारे सभी संदर्भ गीताप्रेस के कल्याण शिवमहापुराणाङ्क के अनुसार हैं।

लगभग सब कुछ: सृष्टि, लिंग, सती और पार्वती, कार्तिकेय और गणेश, ज्योतिर्लिंग, शिव के अवतार।
पुराण
लिङ्गपुराण
लगभग 5वीं–10वीं शताब्दी ई. (भिन्न स्तर)

Liṅga Purāṇa

संस्कृत

लिंग के अर्थ और पूजा पर केंद्रित शैव पुराण।

अग्नि-स्तंभ (लिंगोद्भव), शैव पूजा-विधि और दर्शन।
पुराण
स्कन्दपुराण
मूल भाग लगभग 6ठी–7वीं शताब्दी ई.; बाद में बड़े विस्तार

Skanda Purāṇa

संस्कृत

सबसे बड़ा पुराण, तीर्थों के खंडों (काशी खंड, केदार खंड आदि) के लिए प्रसिद्ध।

शिव के तीर्थों की महिमा, स्कंद का जीवन, शिव-परिवार।
पुराण
भागवतपुराण
लगभग 9वीं–10वीं शताब्दी ई.

Bhāgavata Purāṇa

संस्कृत

एक वैष्णव पुराण — पर इसमें शिव की कई प्रिय कथाएँ हैं।

नीलकंठ और समुद्र मंथन (8.7), दक्ष-यज्ञ (4.2–4.7), वृकासुर (10.88)।
काव्य
कुमारसम्भव
लगभग 4थी–5वीं शताब्दी ई. (कालिदास)

Kumārasambhava

संस्कृत

कुमार (कार्तिकेय) के जन्म पर कालिदास का काव्य। काव्य है, शास्त्र नहीं।

पार्वती का तप, काम-दहन, शिव-पार्वती विवाह।
तमिल शैव
தேவாரம்
लगभग 6ठी–8वीं शताब्दी ई.

Tēvāram

तमिल

तीन महान नायनार कवियों — अप्पर, संबंदर और सुंदरर — के स्तोत्र, जो तमिलनाडु के मंदिरों में गाए जाते हैं।

सैकड़ों मंदिरों में शिव के प्रति आत्मीय, भावपूर्ण भक्ति।
तमिल शैव
பெரிய புராணம்
12वीं शताब्दी ई. (सेक्किऴार)

Periya Purāṇam

तमिल

तिरसठ नायनार संतों के जीवन-चरित।

कण्णप्प और अन्य महान भक्त — प्रेम का उत्तर देने वाले शिव।
कश्मीर शैव
शिवसूत्र
लगभग 9वीं शताब्दी ई. (वसुगुप्त)

Śiva Sūtras

संस्कृत

कश्मीर शैव दर्शन के मूल सूत्र, जो वसुगुप्त पर प्रकट हुए माने जाते हैं।

“चैतन्यम् आत्मा” — चैतन्य ही आत्मा है। शुद्ध चेतना के रूप में शिव।
वीरशैव
ವಚನ
12वीं शताब्दी ई.

Vacanas

कन्नड़

बसवण्णा, अक्क महादेवी, अल्लम प्रभु और अन्य वीरशैव संतों के छोटे मुक्त-छंद वचन।

कूडलसंगम, चेन्नमल्लिकार्जुन के रूप में शिव — हृदय के देवता, मंदिर और जाति से परे।

तिथियाँ विद्वानों के अनुमानित काल हैं। इनमें से कई ग्रंथ सदियों में विकसित हुए, और इनके काल पर मतभेद है।