मृत्युंजय को, रुद्र को, नीलकंठ को, शम्भु को; अमृत के ईश्वर को, शर्व को, महादेव को — आपको नमस्कार।
एक ही श्लोक में सात नाम। इसे प्रायः महामृत्युंजय मंत्र के बाद, आरोग्य और दीर्घायु की प्रार्थना के रूप में, पढ़ा जाता है।
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मूल पाठ
मृत्युञ्जयाय रुद्राय नीलकण्ठाय शम्भवे ।
अमृतेशाय शर्वाय महादेवाय ते नमः ॥
mṛtyuñjayāya rudrāya nīlakaṇṭhāya śambhave |
amṛteśāya śarvāya mahādevāya te namaḥ ||
अनुवाद
मृत्युंजय को, रुद्र को, नीलकंठ को, शम्भु को; अमृत के ईश्वर को, शर्व को, महादेव को — आपको नमस्कार।
अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम
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