सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
“saurāṣṭre somanātham” — द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र
कथा और स्थान
सोमनाथ गुजरात के सौराष्ट्र तट पर, वेरावल बंदरगाह के पास प्रभास पाटन में ठीक अरब सागर के किनारे स्थित है। इस स्थान का प्राचीन नाम प्रभास है, और द्वादश ज्योतिर्लिंगों की पारंपरिक गिनती यहीं से शुरू होती है: “सौराष्ट्रे सोमनाथं च”।
शिव पुराण के अनुसार चंद्रमा का विवाह दक्ष की सत्ताईस कन्याओं से हुआ, पर उनका सारा स्नेह रोहिणी पर ही रहा। बाकी बहनों ने पिता से शिकायत की। बार-बार समझाने पर भी जब चंद्रमा नहीं माने, तो दक्ष ने उन्हें क्षय होने का शाप दे दिया। चंद्रमा की कांति घटने लगी तो देवता ब्रह्मा के पास गए, और ब्रह्मा ने चंद्रमा को प्रभास क्षेत्र में मृत्युंजय मंत्र से शिव की आराधना करने को कहा। शिव प्रसन्न हुए। उन्होंने शाप को पूरी तरह मिटाया नहीं, पर हल्का कर दिया: चंद्रमा एक पक्ष में घटेंगे और अगले पक्ष में फिर बढ़ेंगे। चंद्रमा और देवताओं की प्रार्थना पर शिव वहीं सोमनाथ, यानी सोम (चंद्रमा) के नाथ, के रूप में विराजमान हुए।
इतिहास में यह मंदिर कई बार तोड़ा गया और कई बार फिर बना; सन् 1026 में महमूद गज़नवी का आक्रमण सबसे अधिक जाना जाता है। वर्तमान मंदिर स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर बना, और 1951 में भारत के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में ज्योतिर्लिंग की प्रतिष्ठा हुई। इसलिए बहुत से श्रद्धालुओं के लिए सोमनाथ पूजा का स्थान होने के साथ-साथ फिर से उठ खड़े होने का प्रतीक भी है, ठीक वैसे ही जैसे कथा में चंद्रमा को अपनी कांति वापस मिलती है।
यात्री के लिए
समय, मार्ग और व्यवस्था बदलती रहती है — जाने से पहले मंदिर की आधिकारिक सूचना देख लें।
- निकटतम नगर और रेलवे स्टेशन: वेरावल, जो कुछ ही किलोमीटर दूर है; सोमनाथ का अपना छोटा स्टेशन भी है।
- मंदिर खुले अरब सागर के सामने खड़ा है।
- पास ही त्रिवेणी संगम है, जहाँ हिरण, कपिला और सरस्वती नदियों का समुद्र से मिलना माना जाता है; यह स्नान का पारंपरिक स्थान है।
- मंदिर साल भर खुला रहता है। महाशिवरात्रि और कार्तिक पूर्णिमा के मेले पर सबसे अधिक भीड़ होती है।
पूरी कथा
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शिव का केंद्रीय पुराण, सात संहिताओं में: विद्येश्वर, रुद्र (पाँच खंडों में), शतरुद्र, कोटिरुद्र, उमा, कैलास और वायवीय। अध्याय-संख्या संस्करणों में बदलती है; हमारे सभी संदर्भ गीताप्रेस के कल्याण शिवमहापुराणाङ्क के अनुसार हैं।
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