सौराष्ट्र में सोमनाथ, श्रीशैल पर मल्लिकार्जुन; उज्जैन में महाकाल, ओंकार में अमलेश्वर; परली में वैद्यनाथ, डाकिनी में भीमशंकर; सेतुबंध पर रामेश्वर, दारुका वन में नागेश; वाराणसी में विश्वेश्वर, गौतमी (गोदावरी) के तट पर त्र्यम्बक; हिमालय में केदार, और शिवालय में घुश्मेश्वर।
छह पंक्तियों में एक पूरी तीर्थयात्रा। परंपरा कहती है कि इसका पाठ बारहों धामों के दर्शन का पुण्य देता है।
“परल्यां वैद्यनाथम्” पर ध्यान दें — स्तोत्र स्वयं वैद्यनाथ के लिए परली (महाराष्ट्र) का नाम लेता है, जबकि शिव पुराण की अपनी सूची “चिताभूमि” कहती है — परंपरा से झारखंड का देवघर, जिसे अधिकांश भक्त मानते हैं। कई ज्योतिर्लिंगों के एक से अधिक दावेदार हैं; हम मानचित्र पर सबको दिखाते हैं।
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