मैं उमापति देव को, देवताओं के गुरु को वंदन करता हूँ; जगत् के कारण को वंदन करता हूँ। सर्पों से विभूषित, मृग धारण करने वाले को वंदन; पशुओं (सब जीवों) के स्वामी को वंदन। सूर्य, चंद्र और अग्नि जिनके नेत्र हैं, उन्हें वंदन; मुकुंद के प्रिय को वंदन। भक्तों के आश्रय, वरदाता को वंदन; शिव शंकर को वंदन।
शिव-पूजा के आरंभ में बोला जाने वाला अत्यंत प्रिय प्रार्थना-श्लोक। इसमें आठ बार “वन्दे” आता है।
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मूल पाठ
वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं वन्दे जगत्कारणं
वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं वन्दे पशूनां पतिम् ।
वन्दे सूर्यशशाङ्कवह्निनयनं वन्दे मुकुन्दप्रियं
वन्दे भक्तजनाश्रयं च वरदं वन्दे शिवं शङ्करम् ॥
vande deva umāpatiṃ sura-guruṃ vande jagat-kāraṇaṃ
vande pannaga-bhūṣaṇaṃ mṛga-dharaṃ vande paśūnāṃ patim |
vande sūrya-śaśāṅka-vahni-nayanaṃ vande mukunda-priyaṃ
vande bhakta-janāśrayaṃ ca varadaṃ vande śivaṃ śaṅkaram ||
अनुवाद
मैं उमापति देव को, देवताओं के गुरु को वंदन करता हूँ; जगत् के कारण को वंदन करता हूँ। सर्पों से विभूषित, मृग धारण करने वाले को वंदन; पशुओं (सब जीवों) के स्वामी को वंदन। सूर्य, चंद्र और अग्नि जिनके नेत्र हैं, उन्हें वंदन; मुकुंद के प्रिय को वंदन। भक्तों के आश्रय, वरदाता को वंदन; शिव शंकर को वंदन।
अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम
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