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तैत्तिरीय आरण्यक (महानारायण उपनिषद्)

रुद्र गायत्री

रुद्रगायत्री
मूल मूल पाठ
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि ।तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥
oṃ tatpuruṣāya vidmahe mahādevāya dhīmahi |tan no rudraḥ pracodayāt ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

हम उस परम पुरुष को जानें; महादेव का हम ध्यान करते हैं। वे रुद्र हमें उस ओर प्रेरित करें।

भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं

गायत्री के तीन अंग होते हैं: “हम जानें”, “हम ध्यान करें”, “वे हमें प्रेरित करें”। यह गायत्री शिव के पाँच मुखों में से एक, तत्पुरुष, को संबोधित है, और शिव-जप के सबसे प्रचलित मंत्रों में है।

जप पृष्ठ पर इसे माला पर गिना जा सकता है — लगभग सात सेकंड में एक बार।

प्रमाण प्रमाण
अध्याय
निश्चित
तैत्तिरीय आरण्यक (महानारायण उपनिषद्)
प्रपाठक 10, पहले अनुवाक की गायत्रियों में
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मूल पाठ

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि ।

तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥

oṃ tatpuruṣāya vidmahe mahādevāya dhīmahi |

tan no rudraḥ pracodayāt ||

अनुवाद

हम उस परम पुरुष को जानें; महादेव का हम ध्यान करते हैं। वे रुद्र हमें उस ओर प्रेरित करें।

अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

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