जो शिव हैं, गौरी के मुख-कमल को खिलाने वाले सूर्य हैं, दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले हैं; श्री नीलकंठ, वृषध्वज — उन “शि”कार स्वरूप शिव को नमस्कार।
तीसरा श्लोक — “शि” का। यह इस साइट की दो कथाओं की याद दिलाता है: दक्ष-यज्ञ और नीलकंठ।
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मूल पाठ
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द-
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय
तस्मै शिकाराय नमः शिवाय ॥
śivāya gaurī-vadanābja-vṛnda-
sūryāya dakṣādhvara-nāśakāya |
śrī-nīlakaṇṭhāya vṛṣa-dhvajāya
tasmai śi-kārāya namaḥ śivāya ||
अनुवाद
जो शिव हैं, गौरी के मुख-कमल को खिलाने वाले सूर्य हैं, दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले हैं; श्री नीलकंठ, वृषध्वज — उन “शि”कार स्वरूप शिव को नमस्कार।
अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम
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