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शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्

पंचाक्षर स्तोत्र — शि

शिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् — ३
मूल मूल पाठ
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द-सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजायतस्मै शिकाराय नमः शिवाय ॥
śivāya gaurī-vadanābja-vṛnda-sūryāya dakṣādhvara-nāśakāya |śrī-nīlakaṇṭhāya vṛṣa-dhvajāyatasmai śi-kārāya namaḥ śivāya ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

जो शिव हैं, गौरी के मुख-कमल को खिलाने वाले सूर्य हैं, दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले हैं; श्री नीलकंठ, वृषध्वज — उन “शि”कार स्वरूप शिव को नमस्कार।

भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं

तीसरा श्लोक — “शि” का। यह इस साइट की दो कथाओं की याद दिलाता है: दक्ष-यज्ञ और नीलकंठ।

प्रमाण प्रमाण
परंपरा
से
शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्
श्लोक 3
रचयिता (परंपरा अनुसार): आदि शंकराचार्य (परंपरा अनुसार)
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मूल पाठ

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द-

सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।

श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय

तस्मै शिकाराय नमः शिवाय ॥

śivāya gaurī-vadanābja-vṛnda-

sūryāya dakṣādhvara-nāśakāya |

śrī-nīlakaṇṭhāya vṛṣa-dhvajāya

tasmai śi-kārāya namaḥ śivāya ||

अनुवाद

जो शिव हैं, गौरी के मुख-कमल को खिलाने वाले सूर्य हैं, दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले हैं; श्री नीलकंठ, वृषध्वज — उन “शि”कार स्वरूप शिव को नमस्कार।

अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

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