जो मंदाकिनी के जल और चंदन से चर्चित हैं, नंदीश्वर और प्रमथगणों के स्वामी महेश्वर हैं; मंदार और अनेक पुष्पों से पूजित — उन “म”कार स्वरूप शिव को नमस्कार।
स्तोत्र का दूसरा श्लोक — “म” अक्षर का।
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मूल पाठ
मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय
नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय ।
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय
तस्मै मकाराय नमः शिवाय ॥
mandākinī-salila-candana-carcitāya
nandīśvara-pramatha-nātha-maheśvarāya |
mandāra-puṣpa-bahu-puṣpa-supūjitāya
tasmai ma-kārāya namaḥ śivāya ||
अनुवाद
जो मंदाकिनी के जल और चंदन से चर्चित हैं, नंदीश्वर और प्रमथगणों के स्वामी महेश्वर हैं; मंदार और अनेक पुष्पों से पूजित — उन “म”कार स्वरूप शिव को नमस्कार।
अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम
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