← सभी श्लोक
TS 4.5.8

जहाँ “नमः शिवाय” पहली बार आता है

नमः शिवाय च शिवतराय च
मूल मूल पाठ
नमः शम्भवे च मयोभवे च ।नमः शङ्कराय च मयस्कराय च ।नमः शिवाय च शिवतराय च ॥
namaḥ śambhave ca mayobhave ca |namaḥ śaṅkarāya ca mayaskarāya ca |namaḥ śivāya ca śivatarāya ca ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

शांति के स्रोत और आनंद के स्रोत को नमस्कार। शांति देने वाले और आनंद देने वाले को नमस्कार। मंगलमय को नमस्कार — और उससे भी अधिक मंगलमय को नमस्कार।

भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं

यह श्री रुद्रम् का हृदय है — यजुर्वेद में रुद्र की महान स्तुति। पाँच अक्षर न-मः-शि-वा-य — वह पंचाक्षर मंत्र जिस पर इस पूरी साइट का नाम है — यहीं मिलते हैं।

स्तोत्र की गति पर ध्यान दें: रुद्रम् का अधिकांश भाग उग्र, अदम्य रुद्र को संबोधित है। यहाँ वह उग्रता शंभु, शंकर, शिव में घुल जाती है — शांत, कृपालु, मंगलमय।

प्रमाण प्रमाण
अध्याय
निश्चित
कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता) — श्री रुद्रम्, नमकम्
कांड 4, प्रपाठक 5, अनुवाक 8
TS 4.5.8
अनुवाक निश्चित; उप-मंत्र संख्या छपे संस्करण से मिलानी है।
अर्पण

जो मन में है, अर्पित करें

इनमें भी मिलता है

श्लोक
निश्चित
शुक्ल यजुर्वेद (वाजसनेयी संहिता)
अध्याय 16, मंत्र 41
VS 16.41
पाठ: “शम्भवाय च मयोभवाय च…”।
विचार

आपके मन में क्या रह गया?

एक पंक्ति, एक स्मृति, एक प्रश्न — इसने आपके मन में जो जगाया, वह साझा कीजिए। हर विचार प्रकाशित होने से पहले पढ़ा जाता है।

2 में से 2 स्रोत अध्याय या श्लोक तक निश्चित। यह पृष्ठ अभी किसी संपादक द्वारा समीक्षित नहीं है। हम कैसे जाँचते हैं →

वेदरुद्रम्पंचाक्षर
अगला: प्रचंड नृत्य का स्तोत्र →