मूल मूल पाठ
नमः शम्भवे च मयोभवे च ।नमः शङ्कराय च मयस्कराय च ।नमः शिवाय च शिवतराय च ॥
namaḥ śambhave ca mayobhave ca |namaḥ śaṅkarāya ca mayaskarāya ca |namaḥ śivāya ca śivatarāya ca ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम
शांति के स्रोत और आनंद के स्रोत को नमस्कार। शांति देने वाले और आनंद देने वाले को नमस्कार। मंगलमय को नमस्कार — और उससे भी अधिक मंगलमय को नमस्कार।
भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं
यह श्री रुद्रम् का हृदय है — यजुर्वेद में रुद्र की महान स्तुति। पाँच अक्षर न-मः-शि-वा-य — वह पंचाक्षर मंत्र जिस पर इस पूरी साइट का नाम है — यहीं मिलते हैं।
स्तोत्र की गति पर ध्यान दें: रुद्रम् का अधिकांश भाग उग्र, अदम्य रुद्र को संबोधित है। यहाँ वह उग्रता शंभु, शंकर, शिव में घुल जाती है — शांत, कृपालु, मंगलमय।
प्रमाण प्रमाण
अध्याय
निश्चित
निश्चित
कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता) — श्री रुद्रम्, नमकम्
कांड 4, प्रपाठक 5, अनुवाक 8
TS 4.5.8
अनुवाक निश्चित; उप-मंत्र संख्या छपे संस्करण से मिलानी है।