जो कर्पूर के समान गौर हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं, नागराज जिनका हार है; जो सदा हृदय-कमल में वास करते हैं — भवानी सहित उन भव को मैं नमन करता हूँ।
संभवतः शिव का सबसे प्रसिद्ध श्लोक, जो घरों और मंदिरों में आरती के अंत में गाया जाता है।
इसे प्रायः यजुर्वेद या शिव पुराण का कहा जाता है, पर हमें यह दोनों में नहीं मिला; इसलिए हम इसे ईमानदारी से पूजा-परंपरा का श्लोक लिख रहे हैं।
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मूल पाठ
कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे
भवं भवानीसहितं नमामि ॥
karpūra-gauraṃ karuṇāvatāraṃ
saṃsāra-sāraṃ bhujagendra-hāram |
sadā vasantaṃ hṛdayāravinde
bhavaṃ bhavānī-sahitaṃ namāmi ||
अनुवाद
जो कर्पूर के समान गौर हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं, नागराज जिनका हार है; जो सदा हृदय-कमल में वास करते हैं — भवानी सहित उन भव को मैं नमन करता हूँ।
अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम
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