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शिव पुराण

जिनका आधा शरीर शैलसुता हैं

यो धत्ते निजमायया
मूल मूल पाठ
यो धत्ते निजमाययैव भुवनाकारं विकारोज्झितोयस्याहुः करुणाकटाक्षविभवौ स्वर्गापवर्गाभिधौ ।प्रत्यग्बोधसुखाद्वयं हृदि सदा पश्यन्ति यं योगिन-स्तस्मै शैलसुताञ्चितार्धवपुषे शश्वन्नमस्तेजसे ॥
yo dhatte nija-māyayaiva bhuvanākāraṃ vikārojjhitoyasyāhuḥ karuṇā-kaṭākṣa-vibhavau svargāpavargābhidhau |pratyag-bodha-sukhādvayaṃ hṛdi sadā paśyanti yaṃ yoginastasmai śaila-sutāñcitārdha-vapuṣe śaśvan namas tejase ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

जो निर्विकार रहते हुए भी अपनी ही माया से जगत् का आकार धारण करते हैं; स्वर्ग और मोक्ष जिनके करुणा-कटाक्ष के ही वैभव कहे जाते हैं; योगी जिन्हें सदा हृदय में आत्मज्ञान के अद्वय आनंद के रूप में देखते हैं — उन तेजोमय को, जिनका आधा शरीर शैलसुता से सुशोभित है, सदा नमस्कार।

भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं

यह कोटिरुद्र संहिता का मंगलाचरण है, जो आगे बारह ज्योतिर्लिंगों की कथा कहती है। यह एक ही साँस में शिव को तेज के रूप में और अर्धनारीश्वर के रूप में नमन करता है।

प्रमाण प्रमाण
श्लोक
निश्चित
शिव पुराण
कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 1, मंगलाचरण
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मूल पाठ

यो धत्ते निजमाययैव भुवनाकारं विकारोज्झितो

यस्याहुः करुणाकटाक्षविभवौ स्वर्गापवर्गाभिधौ ।

प्रत्यग्बोधसुखाद्वयं हृदि सदा पश्यन्ति यं योगिन-

स्तस्मै शैलसुताञ्चितार्धवपुषे शश्वन्नमस्तेजसे ॥

yo dhatte nija-māyayaiva bhuvanākāraṃ vikārojjhito

yasyāhuḥ karuṇā-kaṭākṣa-vibhavau svargāpavargābhidhau |

pratyag-bodha-sukhādvayaṃ hṛdi sadā paśyanti yaṃ yoginas

tasmai śaila-sutāñcitārdha-vapuṣe śaśvan namas tejase ||

अनुवाद

जो निर्विकार रहते हुए भी अपनी ही माया से जगत् का आकार धारण करते हैं; स्वर्ग और मोक्ष जिनके करुणा-कटाक्ष के ही वैभव कहे जाते हैं; योगी जिन्हें सदा हृदय में आत्मज्ञान के अद्वय आनंद के रूप में देखते हैं — उन तेजोमय को, जिनका आधा शरीर शैलसुता से सुशोभित है, सदा नमस्कार।

अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

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