नित्य युवा, एक-दूसरे से जुड़े स्वरूप वाले मंगलमय युगल को नमस्कार; पर्वतराज की पुत्री और वृषध्वज को — शंकर और पार्वती को बार-बार नमस्कार।
शिवाभ्याम् द्विवचन है: “दोनों शिवों को” — शिव और शिवा। यह स्तोत्र उन्हें सदा एक साथ नमन करता है, कभी अलग नहीं।
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मूल पाठ
नमः शिवाभ्यां नवयौवनाभ्यां
परस्पराश्लिष्टवपुर्धराभ्याम् ।
नगेन्द्रकन्यावृषकेतनाभ्यां
नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥
namaḥ śivābhyāṃ nava-yauvanābhyāṃ
parasparāśliṣṭa-vapur-dharābhyām |
nagendra-kanyā-vṛṣa-ketanābhyāṃ
namo namaḥ śaṅkara-pārvatībhyām ||
अनुवाद
नित्य युवा, एक-दूसरे से जुड़े स्वरूप वाले मंगलमय युगल को नमस्कार; पर्वतराज की पुत्री और वृषध्वज को — शंकर और पार्वती को बार-बार नमस्कार।
अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम
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