मूल मूल पाठ
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनायभस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।नित्याय शुद्धाय दिगम्बरायतस्मै नकाराय नमः शिवाय ॥
nāgendra-hārāya trilocanāyabhasmāṅga-rāgāya maheśvarāya |nityāya śuddhāya digambarāyatasmai na-kārāya namaḥ śivāya ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम
जो नागराज को हार की तरह धारण करते हैं, जो त्रिनेत्र हैं, जिनके अंगों पर भस्म का लेप है, जो महेश्वर हैं; जो नित्य हैं, शुद्ध हैं, दिशाओं को ही वस्त्र बनाए हुए हैं — उन “न”कार स्वरूप शिव को नमस्कार।
भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं
इस स्तोत्र का हर श्लोक न-मः-शि-वा-य के एक अक्षर पर रचा गया है। यह पहला श्लोक “न” का है।
दिगंबर — “दिशाएँ ही जिनके वस्त्र हैं” — अर्थात शिव को आकाश के सिवा किसी आवरण की आवश्यकता नहीं।
प्रमाण प्रमाण
परंपरा
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शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्
श्लोक 1
रचयिता (परंपरा अनुसार): आदि शंकराचार्य (परंपरा अनुसार)