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लिंगाष्टकम्

लिंगाष्टकम्

लिङ्गाष्टकम् — १
मूल मूल पाठ
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गंनिर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गंतत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥
brahma-murāri-surārcita-liṅgaṃnirmala-bhāsita-śobhita-liṅgam |janmaja-duḥkha-vināśaka-liṅgaṃtat praṇamāmi sadāśiva-liṅgam ||
अनुवाद अनुवाद — अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

जिस लिंग की ब्रह्मा, विष्णु और देवता पूजा करते हैं; जो निर्मल प्रकाश से शोभित है; जो जन्म से उत्पन्न दुःख का नाश करता है — उस सदाशिव-लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

भाष्य व्याख्या — हमारी टिप्पणी, शास्त्र नहीं

लिंगाष्टकम् का पहला श्लोक, जो लिंग-पूजा के समय गाया जाता है। इसकी पहली पंक्ति अग्नि-स्तंभ की कथा की याद दिलाती है, जिसके आगे ब्रह्मा और विष्णु झुके थे।

प्रमाण प्रमाण
परंपरा
से
लिंगाष्टकम्
श्लोक 1
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मूल पाठ

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं

निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।

जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं

तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥

brahma-murāri-surārcita-liṅgaṃ

nirmala-bhāsita-śobhita-liṅgam |

janmaja-duḥkha-vināśaka-liṅgaṃ

tat praṇamāmi sadāśiva-liṅgam ||

अनुवाद

जिस लिंग की ब्रह्मा, विष्णु और देवता पूजा करते हैं; जो निर्मल प्रकाश से शोभित है; जो जन्म से उत्पन्न दुःख का नाश करता है — उस सदाशिव-लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

अनुवादक: ॐ नमः शिवाय टीम

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